मैंने नहीं जानी
परवाह से इतर प्रेम की परिभाषा
मैं नहीं जानती
प्रेम की बातों का शब्दकोष, व्याकरण
या कि इतिहास
मैं सिर्फ इतना ही कर पाई
कि महफूज़ रखा तुम्हारा विश्वास
अपनी ओढ़नी की गाँठ में
अब कहीं गिरेगा नहीं
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