धूप में बादल बनेंगे यह वचन देकर गए जो
वे महासागर हमारी प्यास से परिचित नहीं हैं !
फूल उन पर चढ़ सकें
तो बाग हमने नोच डाले,
होम में हम खुद जले हैं
तब गए उनतक उजाले,
वे कहाँ बैठे हुए हैं क्या कहें किससे बताएं
वे समय-स्वामी अगर उपवास से परिचित नहीं हैं !
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