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ज़िया मज़कूर: बोल पड़ते हैं हम जो आगे से प्यार बढ़ता है इस रवय्ये से

zia mazkoor famous ghazal bol padhte hain hum jo aage se pyaar badta hai is ravvayye se
                
                                                         
                            


बोल पड़ते हैं हम जो आगे से
प्यार बढ़ता है इस रवय्ये से

मैं वही हूँ यक़ीं करो मेरा
मैं जो लगता नहीं हूँ चेहरे से

हम को नीचे उतार लेंगे लोग
इश्क़ लटका रहेगा पंखे से

सारा कुछ लग रहा है बे-तरतीब
एक शय आगे पीछे होने से

वैसे भी कौन सी ज़मीनें थीं
मैं बहुत ख़ुश हूँ आक़-नामे से

ये मोहब्बत वो घाट है जिस पर
दाग़ लगते हैं कपड़े धोने से

2 घंटे पहले

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