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जुर्म ये है कि कभी सच न बता पाएँगे: विभा जैन 'ख़्वाब'

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जुर्म ये है कि कभी सच न बता पाएँगे
                                                                 
                            
और सज़ा ये कि ग़लत मान लिए जाएँगे

फिर वही रात वही चाँद वही तुम वही मैं
क्या किसी छत के मुक़द्दर में लिखे जाएँगे

हिज्र के मारों से कुछ और तो होने से रहा
फिर उदासी का कोई गीत नया गाएँगे

कब तलक तुम भी उठा पाओगे ये बार-ए-वफ़ा
कब तलक हम भी सदाक़त से निभा पाएँगे

ऊब जाएगा फिर इक रोज़ ये दिल दुनिया से
और हम फिर तेरी बाहों में चले आएँगे

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1 hour ago

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