बढ़ेगा दिन न चलेगी हवा हमारे बा'द
समेट लेगा ये दुनिया ख़ुदा हमारे बा'द
हमारा सदक़ा उतारो ऐ बर्छियो भालो
कि कौन रक्खेगा ज़ौक़-ए-क़ज़ा हमारे बाद
हमीं हैं संग-ए-हिफ़ाज़त बक़ा-ए-शीशा-गरी
कि टूट जाएगा हर आइना हमारे बाद
हम ऐसे जाएँगे ले कर बलाएँ दुनिया की
कहीं न होगा कोई हादिसा हमारे बाद
दियों को जाओ ख़बर-दार कर के आ जाओ
कि सरकशी पे तुलेगी हवा हमारे बाद
मुसाफ़िरान-ए-मुसीबत ये कहते जाते हैं
लुटे न ऐसे कोई क़ाफ़िला हमारे बाद
जहाँ पे बिछड़े थे हम तुम वो हो गया दलदल
कि इतना रोया वो इक रास्ता हमारे बाद
हमें भी कोई ख़मोशी नहीं पुकारेगी
तुम्हें भी कोई न देगा सदा हमारे बा'द
मक़ाम-ए-पहलू तिरा मसनदों से आ'ला है
किसी को देना न ये मर्तबा हमारे बाद
कि जाते जाते हमें इतना तो बता जाओ
कि अगली क्या है तुम्हारी दुआ हमारे बाद
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