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निदा फ़ाज़ली: जो हो इक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता

nida fazli ghazal jo ho ik baar wo har baar ho aisa nahi hota
                
                                                         
                            

जो हो इक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता
हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा नहीं होता

हर इक कश्ती का अपना तजरबा होता है दरिया में
सफ़र में रोज़ ही मंजधार हो ऐसा नहीं होता

कहानी में तो किरदारों को जो चाहे बना दीजे
हक़ीक़त भी कहानी-कार हो ऐसा नहीं होता

कहीं तो कोई होगा जिस को अपनी भी ज़रूरत हो
हर इक बाज़ी में दिल की हार हो ऐसा नहीं होता

सिखा देती हैं चलना ठोकरें भी राहगीरों को
कोई रस्ता सदा दुश्वार हो ऐसा नहीं होता 

4 वर्ष पहले

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