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Urdu Poetry: नासिर काज़मी की ग़ज़ल 'इस दुनिया में अपना क्या है, कहने को सब कुछ अपना है'

nasir kazmi famous ghazal is duniya mein apna kya hai kahne ko sab kuch apna hai
                
                                                         
                            


इस दुनिया में अपना क्या है
कहने को सब कुछ अपना है

यूँ तो शबनम भी है दरिया
यूँ तो दरिया भी प्यासा है

यूँ तो हीरा भी है कंकर
यूँ तो मिट्टी भी सोना है

मुँह देखे की बातें हैं सब
किस ने किस को याद किया है

तेरे साथ गई वो रौनक़
अब इस शहर में क्या रक्खा है

बात न कर सूरत तो दिखा दे
तेरा इस में क्या जाता है

ध्यान के आतिश-दान में 'नासिर'
बुझे दिनों का ढेर पड़ा है

2 वर्ष पहले

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