सारी दुनिया है एक पर्दा-ए-राज़
उफ़ रे तेरे हिजाब के अंदाज़
मौत को अहल-ए-दिल समझते हैं
ज़िंदगानी-ए-इश्क़ का आग़ाज़
मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िंदगी की उम्र दराज़
कोई आया तिरी झलक देखी
कोई बोला सुनी तिरी आवाज़
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