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World Sleep Day 2024: 'नींद' पर कहे गए चुनिंदा अशआर

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जिन को नींदों की न हो चादर नसीब 
                                                                 
                            
उन से ख़्वाबों का हसीं बिस्तर न माँग 
~ ताहिर फ़राज़

नींद आँख में भरी है कहाँ रात भर रहे 
किस के नसीब तुम ने जगाए किधर रहे 
~ लाला माधव राम जौहर
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2 वर्ष पहले

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