गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में
- भारतेंदु हरिश्चंद्र
तेरे गालों पे जब गुलाल लगा
ये जहाँ मुझ को लाल लाल लगा
- नासिर अमरोहवी
सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका
बिन होली खेले ही साजन भीग गया
- मुसव्विर सब्ज़वारी
हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है
तीर-ए-नज़र चलाइए होली का रोज़ है
- जूलियस नहीफ़ देहलवी
पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल
जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं
- नादिर लखनवी
कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग
कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग
- अज़हर इक़बाल
चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
- अज़हर इक़बाल
जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की
- नज़ीर अकबराबादी
कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदा से प्रेम करो दिल से प्यार होली में
- नज़ीर बनारसी
रात-भर लोग जलाते रहे होली के अलाव
सुब्ह को मिल के चले रंग उड़ाने के लिए
- अख़तर बस्तवी
फूँक लूँ रंज-ओ-अलम के ख़स-ओ-ख़ाशाक तो फिर
मैं भी निकलूँगा ये त्यौहार मनाने के लिए
- अख़तर बस्तवी
अगर आज भी बोली-ठोली न होगी
तो होली ठिकाने की होली न होगी
- नज़ीर बनारसी
बड़ी गालियाँ देगा फागुन का मौसम
अगर आज ठट्ठा ठिठोली न होगी
- नज़ीर बनारसी
है होली का दिन कम से कम दोपहर तक
किसी के ठिकाने की बोली न होगी
- नज़ीर बनारसी
फ़स्ल-ए-बहार आई है होली के रूप में
सोलह सिंगार लाई है होली के रूप में
- साग़र निज़ामी
मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हमसे तुम कुछ मांगने आओ बहाने फाग के
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
बाज़ार, गली और कूचों में ग़ुल शोर मचाया होली ने
दिल शाद किया और मोह लिया ये जौबन पाया होली ने
- नज़ीर अकबराबादी
अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल
- फ़ाएज़ देहलवी
ले के आई है अजब मस्त अदाएँ होली
मुल्क में आज नए रुख़ से दिखाएँ होली
- कँवल डिबाइवी
बहार आई कि दिन होली के आए
गुलों में रंग खेला जा रहा है
- जलील मानिकपूरी
मुंह पर नकाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
- माधव राम जौहर
मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली
उठो यारों भरो रंगों से झोली
- शैख़ हातिम
माथे पे हुस्न-ख़ेज़ है जल्वा गुलाल का
बिंदी से औज पर है सितारा जमाल का
- उफ़ुक़ लखनवी
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