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फ़ैज़ान उमर: मुझ को पता है करती है बर्बाद शा'इरी

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मुझ को पता है करती है बर्बाद शा'इरी
फिर भी बनी हुई है मिरी खाद शा'इरी

रिश्ता हुआ है ख़त्म मगर अब तलक मिरी
पहली पसंद तो है तिरे बा'द शा'इरी

उस को पसंद है मिरी बातें सुने वो और
बातों के बीच बीच में इक आध शा'इरी

काफ़ी है चार जुज़्व जगाने को रात भर
रोज़ी का ग़म फ़िराक़ तिरी याद शा'इरी

5 घंटे पहले

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