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फ़हमीदा रियाज़ की नज़्म- वो राह बदलते हैं अपनी और मुड़ कर हाथ हिलाते हैं

उर्दू अदब
                
                                                         
                            दुनिया की लम्बी राहों पर हम यूँ तो चलते जाते हैं
                                                                 
                            
कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं जो याद हमेशा आते हैं

वो राह बदलते हैं अपनी और मुड़ कर हाथ हिलाते हैं
लेकिन वो दिलों को यादों की ख़ुशबू बन कर महकाते हैं

ऐसे ही सफ़र करते-करते इक शख़्स मिला हम को भी कहीं
दुनिया में अच्छे लोग बहुत लेकिन उस की सी बात नहीं

वो धीमे लहजे वाला था और धीरे से हँसता था
जितने भी लोग मिले हम को सच जानो सब से अच्छा था

थी लाग न उस के बोलों में की बात न कोई लगावट की
उस के फ़िक़रे टूटे-टूटे उस की आँखें खोई-खोई

कह कर ही न दे जो हम चाहें सोचा ही करे बैठा-बैठा
पर देखे ऐसी नरमी से इक बार तो हो जाए धोका

गो साथ हमारा ख़ूब रहा उस को न हुई पहचान बहुत
गर बूझ ले दिल की बात कभी हो जाता था हैरान बहुत

और हम उस की हैरानी पर शर्मिंदा हो कर रह जाते
कुछ और हमारा मतलब था फिर देर तलक ये समझाते

अब चेहरा उस का उजला हो या आँखें उस की हों गहरी
या उस के प्यारे होंटों की हर बात लगे ठहरी-ठहरी

कुछ अच्छे लोग जो अच्छे होते हैं और राहों में मिल जाते हैं
हैं उन को अपने काम बहुत कब अपना वक़्त गँवाते हैं
कब प्यासे-प्यासे रहते हैं कब जी को रोग लगाते हैं

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3 महीने पहले

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