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अंजुम रहबर: कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं

anjum rehbar famous ghazal kuch din se zindagi mujhe pehchanti nahin
                
                                                         
                            


कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं

वो बे-वफ़ा जो राह में टकरा गया कहीं
कह दूँगी मैं भी साफ़ कि पहचानती नहीं

समझाया बार-हा कि बचो प्यार-व्यार से
लेकिन कोई सहेली कहा मानती नहीं

मैं ने तुझे मुआ'फ़ किया जा कहीं भी जा
मैं बुज़दिलों पे अपनी कमाँ तानती नहीं

'अंजुम' पे हँस रहा है तो हँसता रहे जहाँ

एक वर्ष पहले

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