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अमजद इस्लाम अमजद की ग़ज़ल: चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन

                
                                                         
                            चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन 
                                                                 
                            
क्या रोज़ गरजते हो बरस जाओ किसी दिन 

राज़ों की तरह उतरो मिरे दिल में किसी शब 
दस्तक पे मिरे हाथ की खुल जाओ किसी दिन 

पेड़ों की तरह हुस्न की बारिश में नहा लूँ 
बादल की तरह झूम के घर आओ किसी दिन 

ख़ुशबू की तरह गुज़रो मिरी दिल की गली से 
फूलों की तरह मुझ पे बिखर जाओ किसी दिन  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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