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अमीर ख़ुसरो : बहुत कठिन है डगर पनघट की, कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी

amir khusrow poetry bahut kathin hai dagar panghat ki
                
                                                         
                            बहुत कठिन है डगर पनघट की
                                                                 
                            
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
पनिया भरन को मैं जो गई थी
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी
बहुत कठिन है डगर पनघट की
'ख़ुसरव' निज़ाम के बल-बल जइए
लाज रखो मेरे घूँघट पट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी
बहुत कठिन है डगर पनघट की
4 वर्ष पहले

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