बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है
तेरे साथ तेरी याद आई क्या तू सचमुच आई है
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है
सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
मुझ को ये होश ही न था तू मेरे बाज़ुओं में है
यानी तुझे अभी तलक मैंने रिहा नहीं किया
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
ऐ ख़ुदा जो कहीं नहीं मौजूद
क्या लिखा है हमारी क़िस्मत में
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'मिल रही हो बड़े तपाक के साथ...'
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