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आज का शब्द: विघ्न और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- कर्तव्य

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विघ्न, जिसका अर्थ है- अड़चन, बाधा। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- कर्तव्य
                                                                 
                            

भावुक! भरो भाव रत्नों से, 
भाषा के भंडार भरो। 
देर करो न देशवासी-गण 
अपनी उन्नति आप करो॥ 

एक हृदय से एक ईश का 
धरो विविध ध्यान धरो। 
विश्व-प्रेम-रत, रोम-रोम से— 
गद्गद निर्झर-सदृश झरो॥ 

मन से, वाणी से, कर्मों से, 
आधि, व्याधि, उपाधि हरो। 
अक्षय आत्मा के अधिकारी, 
किसी विघ्न-भय से न डरो॥ 

विचरो अपने पैरों के बल, 
भुज-बल से भव-सिंधु तरो। 
जियो कर्म के लिए जगत में 
और धर्म के लिए मरो॥ 
एक वर्ष पहले

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