'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विघ्न, जिसका अर्थ है- अड़चन, बाधा। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- कर्तव्य
भावुक! भरो भाव रत्नों से,
भाषा के भंडार भरो।
देर करो न देशवासी-गण
अपनी उन्नति आप करो॥
एक हृदय से एक ईश का
धरो विविध ध्यान धरो।
विश्व-प्रेम-रत, रोम-रोम से—
गद्गद निर्झर-सदृश झरो॥
मन से, वाणी से, कर्मों से,
आधि, व्याधि, उपाधि हरो।
अक्षय आत्मा के अधिकारी,
किसी विघ्न-भय से न डरो॥
विचरो अपने पैरों के बल,
भुज-बल से भव-सिंधु तरो।
जियो कर्म के लिए जगत में
और धर्म के लिए मरो॥
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