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आज का शब्द: विभा और रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता- आग की भीख

आज का शब्द- विभा और रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता: आग की भीख
                
                                                         
                            'विभा' का अर्थ होता है-दीप्ति, चमक, प्रकाश या रोशनी, किरण। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- विभा। प्रस्तुत है रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता: आग की भीख
                                                                 
                            

धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा, 
कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा। 
कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है; 
मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज़ रो रहा है? 
दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे; 
बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे। 
प्यारे स्वदेश के हित अंगार माँगता हूँ। 
चढ़ती जवानियों का शृंगार माँगता हूँ।

बेचैन हैं हवाएँ, सब ओर बेकली है, 
कोई नहीं बताता, किश्ती किधर चली है? 
मँधार है, भँवर है या पास है किनारा? 
यह नाश आ रहा या सौभाग्य का सितारा? 
आकाश पर अनल से लिख दे अदृष्ट मेरा, 
भगवान, इस तरी को भरमा न दे अँधेरा। 
तम-वेधिनी किरण का संधान माँगता हूँ। 
ध्रुव की कठिन घड़ी में पहचान माँगता हूँ। 
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5 वर्ष पहले

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