'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- प्रवेश, जिसका अर्थ है- भीतर जाना, घुसना, पैठना, दखल। प्रस्तुत है निर्मला पुतुल की कविता- पूरी दुनिया से छिटककर
यह कविता नहीं
मेरे एकांत का प्रवेश-द्वार है
यहीं आकर सुस्ताती हूँ मैं
टिकाती हूँ यहीं अपना सिर
ज़िंदगी की भाग-दौड़ से थक-हारकर
जब लौटती हूँ यहाँ
आहिस्ता से खुलता है
इसके भीतर एक द्वार
जिसमें धीरे से प्रवेश करती मैं
तलाशती हूँ अपना निजी एकांत
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