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आज का शब्द: पवनसुत और गुलाब खंडेलवाल की कविता- पीड़ा राम के मन की !

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्दग शृंखला में आज का शब्द है- पवनसुत, जिसका अर्थ है- वायुपुत्र, हनुमान। प्रस्तुत है गुलाब खंडेलवाल की कविता- पीड़ा राम के मन की!
                                                                 
                            

दो सुत प्यारे
दशरथ की आँखों के तारे
बड़ी कठिनता से पाकर
मुनि वन को सिधारे
 
रण की दीक्षा,
मिली कुमारों को शुभ शिक्षा
विजित ताड़का-सुबाहु निशिचर
सफल परीक्षा
 
नव परिणीता
चली राम के सँग-सँग सीता
धनुष-भंग से हर्षित जन-मन
देवों का दुख बीता
 
धूम अभिषेक की,
काल से चली नहीं एक की
कुबुद्धि-मंथरा-प्रेरित
वामा वाम टेक की
 
कैकेई कोप-भवन में
काँपे दशरथ सुनकर मन में
दो वरों के साथ ही
प्राण दे दिए क्षण में
 
प्रिया-अनुज साथ,
वन को चले राम रघुनाथ
भेज दी चुनौती लंकापति को
दुर्मति शूर्पणखा के हाथ
 
सीता के हरण की,
वेदना जटायु के मरण की 
कौन जाने पवनसुत बिना, 
पीड़ा राम के मन की!
 
हाँक हनुमान की,
सुनते ही पुलक उठी जानकी
पल में स्वर्ण-लंका जल राख हुई,
भूसी ज्यों धान की
 
कुम्भकर्ण, मेघनाद,
अंत में रावण भी गया मलते हाथ
रण जीतकर फिरे अयोध्या में श्री राम,
सीता-लक्ष्मण साथ!  

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5 महीने पहले

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