आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: निष्ठा और हरिवंशराय बच्चन की कविता- अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- निष्ठा, जिसका अर्थ है- किसी की विश्वसनीयता, सत्ता सामर्थ्य आदि के प्रति होने वाला पूज्य भाव। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?
                                                                 
                            


 एक

अँधेरी रात में दीपक
जलाए कौन बैठा है?

उठी ऐसी घटा नभ में
छिपे सब चाँद औ’ तारे, 
उठा तूफ़ान वह नभ में
गए बुझ दीप भी सारे;

मगर इस रात में भी लौ
लगाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक 
जलाए कौन बैठा है?

दो

गगन में गर्व से उठ-उठ, 
गगन में गर्व से घिर-घिर, 
गरज कहती घटाएँ हैं, 
नहीं होगा उजाला फिर;
मगर चिर ज्योति में निष्ठा
जमाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक 
जलाए कौन बैठा है?

तीन

तिमिर के राज का ऐसा 
कठिन आतंक छाया है, 
उठा जो शीश सकते थे 
उन्होंने सिर झुकाया है;

मगर विद्रोह की ज्वाला
जलाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक 
जलाए कौन बैठा है?

चार

प्रलय का सब समाँ बाँधे 
प्रलय की रात है छाई, 
विनाशक शक्तियों की इस
तिमिर के बीच बन आई;

मगर निर्माण में आशा 
दृढ़ाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक 
जलाए कौन बैठा है?

पाँच

प्रभंजन, मेघ, दामिनि ने 
न क्या तोड़ा, न क्या फोड़ा, 
धरा के और नभ के बीच 
कुछ साबित नहीं छोड़ा;

मगर विश्वास को अपने 
बचाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए 
कौन बैठा है?
आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर