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आज का शब्द: मेरु और महादेवी वर्मा की कविता-मैं न यह पथ जानती री!

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- मेरु, जिसका अर्थ है- पुराणों में वर्णित एक पर्वत जो सोने का कहा गया है, सुमेरु। प्रस्तुत है महादेवी वर्मा की कविता- मैं न यह पथ जानती री!
                                                                 
                            

मैं न यह पथ जानती री!
धर्म हों विद्युत् शिखायें,
अश्रु भले बे आज अग-जग वेदना की घन-घटायें!
सिहरता मेरा न लघु उर,
काँपते पग भी न मृदुतर,
सुरभिमय पथ में सलोने स्वजन को पहचानती री!

ज्वाल के हों सिन्धु तरलित,
तुहिन-विजडित मेरु शत-शत,
पार कर लूँगी वही पग-चाप यदि कर दें निमंत्रित
नाप लेगा नभ विहग-मन
बाँध लेगा प्रलय मृदु तन,
किसलिये ये फूल-सोदर शूल आज बखानती री?

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4 महीने पहले

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