आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: झुमका और संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- झुमका, जिसका अर्थ है- कान में पहनने का एक प्रसिद्ध गहना। प्रस्तुत है संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया
                                                                 
                            

अल्हड़ गदराई युवती सा बहता
अलमस्त बरसाती नाला है-झुमका
 
लगा बनने उस पर बाँध
स्थाई सन्नाटे में पसरे
मेरे कस्बे में शोर मच गया
कस्बे से से झुंड के झुंड उसे देखने जाने लगे
इंजीनियर, ठेकेदारों की फ़ौज़ आने लगी 

कस्बे का व्यापार बढ़ निकला 
बातों का भी 
नए-नए लोग आए 
लोगों को शगल मिला 
बेरोज़गारों को काम 
व्यापारियों को दाम  आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर