अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जनतंत्र, जिसका अर्थ है- एक शासन प्रणाली जिसमें जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि शासन चलाते हैं। प्रस्तुत है रामधारी सिंह दिनकर कविता- मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है
सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
जनता? हां, मिट्टी की अबोध मूरतें वही,
जाडे़-पाले की कसक सदा सहनेवाली,
जब अंग-अंग में लगे सांप हो चूस रहे
तब भी न कभी मुंह खोल दर्द कहने वाली।
जनता ? हां, लंबी - बड़ी जीभ की वही कसम,
"जनता, सचमुच ही, बड़ी वेदना सहती है।"
"सो ठीक,मगर,आखिर,इस पर जनमत क्या है?"
'है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है?"
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