आज का शब्द- घट और कविता भट्ट की रचना- हे पिता मेरे !

आज का शब्द- घट और कविता भट्ट की रचना- हे पिता मेरे !
                
                                                             
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- घट, जिसका अर्थ है- जलपात्र, कलश, हृदय; मन, कुंभक, अंतर, कुंभ राशि, पिंड; देह, किनारा। प्रस्तुत है कविता भट्ट की रचना- हे पिता मेरे !
                                                                     
                            

हे पिता मेरे !
करते हुए आज
घट- स्थापना 
स्नेह -जल भरना 
घट-भीतर 
और अक्षत कुछ 
मेरे नाम के
उसमें डाल देना आगे पढ़ें

8 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X