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आज का शब्द: अयाचित और केदारनाथ अग्रवाल की कविता- बोला सन्नाटे में नेह

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अयाचित, जिसका अर्थ है- बिना माँगा हुआ। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- बोला सन्नाटे में नेह
                                                                 
                            

कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
पंचम स्वर में चढ़कर बोला सन्नाटे में नेह

अधजागी पलकें अकुलाईं
खुले नैन के द्वार
मंत्र-भारती-हृदय-देश में-
पहुँची पिकी-पुकार
कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
पंचम स्वर में चढ़कर बोला सन्नाटे में नेह

छूमंतर हो गया
सिसकता सरपीला संदेह
एक साथ मधु-पर्व मनाते गेही और अगेह
कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
पंचम स्वर में चढ़कर बोला सन्नाटे में नेह

ताप-तीर-तलवार चलाता
बीत गया है जेठ
कोकिल-कंठी बान चलाता
जीत गया है जेठ
कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
पंचम स्वर में चढ़कर बोला सन्नाटे में नेह

आज अयाचित मिला मनुज को
मनचाहा संगीत
प्रकृति पुरुष को, जिला रही है
पिला रही है प्रीत
कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
पंचम स्वर में चढ़कर बोला सन्नाटे में नेह

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3 महीने पहले

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