'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अपराजेय, जिसका अर्थ है- जो पराजित न किया जा सके। प्रस्तुत है बसंत त्रिपाठी की कविता- रात के ही किसी अचिह्नित क्षण में
रात के ही किसी अचिह्नित क्षण में
नींद के मंच पर
जब सपने का महावृत्तांत
एक चमकदार अलौकिक नृत्य की तरह जारी था
शायद तभी बरसना शुरू हुए होंगे बादल
आषाढ़ ने इस बार
रात के अँधेरे में आना तय कर रखा था
मुझे लगभग क्षण का भी अंदाज़ नहीं
लेकिन यह ज़रूर हुआ था
कि सपनों में बिजली कड़कड़ाई थी
पानी के बरसने की आवाज़
रूप बदलकर सपने में दाख़िल हुई थी
मैंने बारिश की अगुवाई नहीं की
लेकिन सपनों ने उसके वैभव के गीत गाए
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