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Ramdhari Singh Dinkar: हिंदी कविता का हर पाठक क्यूं रश्मिरथी का पाठ करना चाहता है?

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बीते कुछ सालों में साहित्य को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है, इसमें सोशल मीडिया की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। पोस्टर से लेकर काव्य पाठ के वीडियो तक वायरल होते हैं और शेयर किए जाते हैं। इसका एक कारण है कि साहित्य की दशा और दिशा समाज के लिए होती है। जो भी लिखा या कहा जा रहा है वो लोगों को अपनी ज़िंदगी से मिलता-जुलता लगता है तो वे प्रभावित होते हैं। इसी क्रम में मैंने महसूस किया कि लोगों को कविता-पाठ के लिए महाकवि रामधारी सिंह दिनकर के काव्य-संग्रह से रश्मिरथी बहुत पाती है। सोशल मीडिया पर जितने लोगों ने इसको पढ़ा है उन्हें अच्छे व्यूज़ भी मिले हैं। ऐसा नहीं है कि रश्मिरथी के अन्य सर्ग कम अच्छे है बल्कि हर सर्ग की अपनी एक कहानी और चित्रण है लेकिन लोग कृष्ण की चेतावनी को ही चुनते हैं।

कृष्ण की चेतावनी में कृष्ण सभी सभासदों के सामने दुर्योधन को चेतावनी दे रहे हैं कि युद्ध का परिणाम भयंकर होगा। दुर्योधन पाँच गांव देकर इसे टाल सकता था लेकिन उसने वैसा नहीं किया क्यूंकि 'जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।' इस विशेष प्रसंग को पसंद करने के कई कारण हो सकते हैं - कवि की लयात्मकता, शब्द-चयन, गेयता और विषय की बात तो महत्वपूर्ण है ही साथ में कृष्ण का प्रमुख किरदार होना भी मायने रखता है। वह महाभारत के एक ऐसे पात्र हैं जो जन-जन से जुड़े हैं और जब कवि उनकी ओर से कहते हैं कि - सब जन्म मुझी से पाते हैं और लौट मुझी में आते हैं, तो लोगों की भक्ति, साहित्य, भावनाएं सब वहीं जुड़ती हैं। यहां कवि को मालूम है कि कृष्ण के चरित्र को भीतर उतारकर ही उनसे वो सब कहलवाया जा सकेगा। तभी रचना भी अपने पूरे अर्थ पा सकेगी।

ये दिनकर की वो रचना है जिससे सिर्फ़ साहित्य का विद्यार्थी नहीं बल्कि हर व्यक्ति ही जुड़ सकता है। एक ऐसी वास्तविक साहित्यिक कृति जो अपने विषय की परिधि को पार कर आम लोगों तक पहुंचती है और उन्हें प्रभावित करती है। इसलिए इसे अभिनेताओं से लेकर आम लोगों तक ने पढ़ा, इसे बड़े-बड़े मंचों से लेकर स्टूडियों में रिकॉर्ड किया गया तो कभी महफ़िलों में गुनगुनाया गया। महाकवि दिनकर के अद्भुत काव्य-शिल्प ने इसे युगों के लिए अमर कर दिया है। हर कोई इसको पढ़कर अपने भीतर कृष्ण को महसूस कर लेना चाहता है।

फिर ऐसी रचना का पाठ कौन नहीं करना चाहेगा जिसमें लय है, वीर रस है, कृष्ण हैं और शब्दों का ऐसा दुर्लभ संयोजन है जो बहुत ही कम कृतियों में मिलता है।

2 वर्ष पहले

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