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एक साहित्यकार जिन्होंने विधवा विवाह के समर्थन में कहा- "अपनी अंतरात्मा से पूछिए कि मनुष्यता का तकाजा क्या है!"

साहित्य
                
                                                         
                            हिंदू घरानों का विधवा समुदाय आज कितना उद्वेलित हो रहा है, इसका पता आज वेद-शास्त्रों के पन्ने पलटने से नहीं होगा। पोथी बंद करके आँखें बंद कीजिए और ध्यानस्थ होकर हिंदू समाज के अंदर अधिकार हीन व अवलंब हीन कलपने वाली विधवाओं की दशा पर विचार कीजिए, तब अपनी अंतरात्मा से पूछिए कि मनुष्यता का तकाजा क्या है?
                                                                 
                            
         
जब देश में वेदों की ओर लौटने की बात पर जोरों पर थी और समाज में विधवा विवाह की मनाही थी, तब वर्ष 1927 में हिंदी नवजागरण के अग्रदूत और जाने-माने साहित्यकार व संपादक आचार्य शिवपूजन सहाय ने 'विधवा विवाह समस्या' निबंध लिखकर विधवा विवाह के समर्थन में अपने क्रांतिकारी विचारों से जन जागरण किया। आगे पढ़ें

बाल विवाह का किया विरोध

2 वर्ष पहले

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