अकेले बैठना, चुप बैठना—इस प्रश्न की चिंता से मुक्त होकर बैठना कि ‘क्या सोच रहे हो?’—यह भी एक सुख है।
एक निगाह से देखना कलाकार की निगाह से देखना नहीं है।
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