मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब
फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी
इतना नाराज़ हो क्यूँ उस ने जो पत्थर फेंका
उस के हाथों से कभी फूल भी आया होगा
- साग़र आज़मी
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X