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हिंदी फ़िल्मी गीतों में बिखरी है प्रकृति की अनुपम छटा...

praising nature on hindi film song in bollywood
                
                                                         
                            हिंदी फ़िल्मों में प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन बेहतर ढंग से किया गया है। नायक-नायिकाओं और प्रेम के जरिए प्रकृति की ख़ूबसूरती इन गीतों में झलकती है। पर्वतों के किनारे कलरव करते झरने या नदियां हों या फूलों से भरी बगिया हो, गीतों में प्रकृति के सभी तरह के मनोरम दृश्य पेश किए गए हैं। इन गीतों को सुनकर और देखकर मन सौंदर्य की वादियों में रम जाता है। इस खंड में हम हिंदी फ़िल्मों के जरिए प्रकृति और उसके सौंदर्य का बोध आपको कराएंगे।   
                                                                 
                            

इस श्रेणी में सबसे अनुपम गीत 1967 में रिलीज़ फ़िल्म बूंद जो बन गए मोती का है। गीत के बोल हैं 'ये कौन चित्रकार है'। जितेंद्र पर यह गीत फ़िल्माया गया है। भरत व्यास ने इस गीत को लिखा है। मुकेश ने इसमें अपनी मधुर आवाज़ दी है। सतीश भाटिया ने इसे संगीत से सजाया है। गीत में प्रकृति को एक तरह से पेटिंग माना गया है। इसके चित्रकार यानी ईश्वर को प्राकृतिक सौंदर्य के लिए धन्यवाद दिया गया है।  

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कितनी ख़ूबसूरत ये तस्वीर है, मौसम बेमिसाल बेनज़ीर है

9 वर्ष पहले

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