आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन' : तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया

बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन'
                
                                                         
                            तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया 
                                                                 
                            

तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया 
क़सम सर की तेरे, मज़ा कुछ न आया 

नज़र ख़ार की शक़्ल आते हैं सब गुल 
इन आँखों में जब से तू आकर समाया 

असर हो न क्यों दिल में दिल से जो चाहे 
मसल सच है, जो उसको ढूँढ़ा वो पाया 

चमन में है बरसात की आमद-आमद 
अहा आसमाँ पर सियह अब्र छाया 

मचाया है मोरों ने क्या शोरे-मैहशर 
पपीहों ने क्या पुर-गजब रट लगाया 

तुझे शैख़ जिसने बनाया है मोमिन 
हमें भी है हिन्दू उसी ने बनाया 

परीशाँ हो क्यों अब्रे-बेख़ुद भला तुम 
कहो किस सितमगर से है दिल लगाया 

- बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन' 

साभार - हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें, भारतीय ज्ञानपीठ 
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर