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'कैफ़ी आज़मी' जिनकी लिखी नज़्म को स्त्रीवाद का मैनिफ़ेस्टो भी कहा जा सकता है

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                            यह साल कैफ़ी आज़मी का जन्म शताब्दी वर्ष है। पूरे साल विभिन्न स्थानों पर इस अज़ीम शायर की याद में कार्यक्रम आयोजित किेए जा रहे हैं। न सिर्फ़ भारत बल्कि इंग्लैंड समेत दुनियाभर में यह कार्यक्रम हो रहे हैं। कैफ़ी की शख़्सियत उन ख़ास लोगों में शामिल होती है जिन्होंने जो महसूस किया वही जीया और वही लिखा भी। उन्होंने औरतों को साथ चलने की बात की, मज़दूरों के हक़ों की आवाज़ उठाई और किसानों पर नज़्में कहीं।
                                                                 
                            

वे कम्यूनिस्ट पार्टी के सदस्य थे और उन्हीं के मुंबई स्थित रेड फ़्लैग हॉल में रहते थे। जहां उनके साथ 8 परिवार रहा करते थे। जिनके परिवार में पति व पत्नी पार्टी से जुड़े होते उनसे किराया नहीं लिया जाता था लेकिन बाकियों से लिया जाता था। पार्टी अपने मेम्बर को खर्चे के लिए 40 रुपए महीने देती थी। कैफ़ी पार्टी के लिए काम करते थे लेकिन उनकी बेगम शौक़त कैफ़ी से किराया लिया जाता था, क्योंकि वह पार्टी से नहीं जुड़ी थीं। जब कैफ़ी और शौक़त इस रेड फ़्लैग हॉल में शिफ़्ट हुए थे तब शाबाना क़रीब एक साल की थीं। आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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