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आख़िरी नग़मा: रोक सकती है मुझे रोक ले दुनिया ‘बख्शी’

anand bakshi
                
                                                         
                            एक गीत की आत्मा होते है उस गीत के हर्फ़ और उन हर्फ़ो को करीने से पिरोने वाला होता है एक गीतकार। ऐसा कलाकार जो अपने गीतों के बोल को तराशता है और एक वक़्त पर ही कई जगह होने की असंभव कल्पना को हकीकत कर देता है। एक समय में हजारों मन उस कलमकार को देख पाते है, महसूस कर पाते है उसके गीतों से। साथ ही उन लोगों के निजी अनुभवों और संवेदनाओ को भी दर्ज करता हुआ वो गीत कोमल स्मृतियों को ज़िंदा कर देता है जो अपनी बात महसूस करते हुए भी लोग कह नहीं पाते है।
                                                                 
                            

एक गीतकार जिसने ढलती शामों में एक डोर से किसी की ओर खिचते मन के लिए गीत लिखा, जिसने प्रेम में लिखे गए खतों को कागज का टुकडा नहीं दिल लिखा, जिसने प्यार के दीवानेपन को लिखा, दो प्रेमियों की अलग थलग धुन को शब्द दिए और बताया कि रूठ कर जाना इतना आसान नहीं प्रेम के सारे रास्ते दिल तक ही लौटते है। आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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