चल पड़ा हूँ राहों पर,
ना मंज़िल की चिंता है,
हर मोड़ कुछ सिखा जाए,
यही जीवन की सत्ता है।
धूप भी है, छांव भी है,
संग में यादें पग-पग की,
कभी हँसी की रुत आई,
कभी बूँदें थीं नम छलकी।
रुकना नहीं, थकना नहीं,
हर कदम में नयी कहानी है,
जो गिरा, वो उठा फिर से,
यही तो असली जवानी है।
फूल मिलें या काँटे आएं,
हर अनुभव की अपनी बात,
सच कहूँ तो हर एक लम्हा,
अपने में है अनमोल सौगात।
मन कहता है चलते जाओ,
कभी न देखो पीछे मुड़,
हर सुबह एक नई शुरुआत है,
हर साँझ में है जीवन का गुर।
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