याद आते हैं अभी भी, दिन वो पुराने।
क्यूं लौटते नहीं , वो माज़ी के ज़माने।।
जब रौनकों से आबाद थे घर-आंगन।
खुशियों से लबरेज़ थे,अपने ठिकाने।।
-यूनुस खान
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