तेरा आना तय था,तो सोते कैसे।
जगे थे, तो ख़्वाबों में खोते कैसे।।
गिला करना , तोहीन-ए-वफा है।
फिर,हम सर-ए-बज़्म रोते कैसे।।
-यूनुस खान
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