मेरे हर जख़्म को , पुराना समझता है।
वो तन्हाई को भी वीराना समझता है।।
मेरे अश्कों को, पानी समझा है उसने।
दर्द को भी,शायद बहाना समझता है।।
बेबसी में, यूं सहरा में पनाह ली हमने।
वो इसे अब मेरा ठिकाना समझता है।।
-यूनुस खान
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