जब से हुई है उससे बात फोन पर।
गुजर रही है तब से, रात फोन पर।।
एक हाथ से अश्क पोंछ रहा हूं मैं।
बस रहता है दूसरा हाथ फोन पर।।
रूबरू हो कर , गुफ्तगू नहीं होती।
होती है रोज , मुलाकात फोन पर।।
-यूनुस खान
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