वो रस्म-ओ-रिवाज,जो उसको बजा लगती है।
गर सच कहूं,तो वो ही मुझको सजा लगती है।।
जिंदगी जीने के जो आदाब , तय किये हैं तूने।
उनसे गुज़र कर,तो ये जिंदगी कज़ा लगती है।।
-यूनुस खान
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