कितनी ख़ामोश है,तन्हाई रात की।
कुछ कह रही है, अंगड़ाई रात की।।
शाम-ओ-सहर, सुकूं देते नहीं मुझे।
इतनी बेवफा है , बेवफाई रात की।।
-यूनुस खान
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