कितनी बार,ऐसा वक्त-ए-शाम आया है।
जब मेरे लिए, तेरा कोई पैग़ाम आया है।।
मेरी प्यास की , कब मिज़ाज-पुरसी हुई।
बता , कब मेरे लिए कोई जाम आया है।।
यूनुस खान
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