एक अरसे बाद आया है, ख़त तेरा।
गुज़री यादों का साया है,ख़त तेरा।।
हर्फ़-बा-हर्फ़ पढ़ कर,पता ये चला।
ग़म-ए-हिज़्र में नहाया है,ख़त तेरा।।
-यूनुस खान
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