तेरी बेवफाई की, किसी को खबर ना हो।
ग़म-ए-जुदाई की किसी को खबर ना हो।।
इसीलिए, क़ैद-बाम-ओ-दर हो गया हूं मैं।
मेरी रूस्वाई की, किसी को खबर ना हो।।
घर के सारे चिराग़ों को बुझा दिया हमने।
मेरी परछाई की, किसी को खबर ना हो।।
ऐ बाद-ए-सबा , हिलाना ना घर के परदे।
मेरी तन्हाई की , किसी को खबर ना हो।।
हर बज़्म में जाना अब छोड़ दिया हमने।
यूं शनासाई की, किसी को खबर ना हो।।
-यूनुस खान
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