अब कुछ भी नहीं है,उजड़े हुए दयार के सिवा।
क्या बचा है आंगन में खस-ओ-खार के सिवा।।
वो दरीचे, वो दालान, जहां गुजरा मेरा बचपन।
आज कुछ बाकी नहीं दर-ओ-दीवार के सिवा।।
-यूनुस खान
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