क्या खबर थी, इस कदर तूफ़ान मिलेंगे।
हर सिम्त साहिल भी , यूं वीरान मिलेंगे।।
हम तो निकले थे मरहम की ज़ुस्तज़ु में।
सोचा ना था, मक़तल के मैदान मिलेंगे।।
-यूनुस खान
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