प्यासे लबों की खातिर,मयखाना ढूंढता हूं।
बज़्म-ए-तरब के दरम्यां, वीराना ढूंढता हूं।।
ये किस मोड़ पर लाकर तूने छोड़ा है मुझे।
हर सू ता-हद-ए-निगाह ठिकाना ढ़ूंढता हूं।।
-यूनुस खान
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