क़दम दर क़दम , नये इम्तिहान मिले हैं।
चारागर भी मुझको लहु-लुहान मिले हैं।।
रौनक-ओ-बज़्म-ए-तरब की, क्या कहूं।
मेले तक भी मुझको तो वीरान मिले हैं।।
-यूनुस खान
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