बहते अश्कों ने, चेहरे पर निशान छोड़ा है।
हर एक दास्तां ने दर्द का उन्वान छोड़ा है।।
बेबस था , मगर फिर भी लड़ा तमाम उम्र।
कौन कहता है, मैंने कभी मैदान छोड़ा है।।
-यूनुस खान
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